Wednesday, 13 November 2013

100 % खेल

कहता रहा !
सब जीवन भर !
सहता रहा !
**************हाइकू : डॉ . प्रतिभा स्वाति ***** 
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           ये हाइकू है ! जी हाँ , 100 % हाइकू  ही है !
पर दिल है कि मानता नही ! क्यूंकि  हाइकू तो एक खेल 
है ! बच्चों  का खेल ! अब उसे जापान के बच्चे  खेलें ,
या  भारत के . या फिर  विश्व के किसी भी देश के !
   अब तीन  तथ्य सामने आते हैं -----
1. हाइकू 
 2. खेल 
3. बच्चे !
             एक चौथा तथ्य भी है स्थान या देश ! पर चूँकि मै हाइकू को भारत ही के परिप्रेक्ष्य में विवेचित करना 
चाह रही हूँ ! इसलिए हम 3 मुद्दों पर चर्चा कर सकते है !
पर ,तीसरा  मुद्दा अर्थात ' बच्चो ' को हमे हाइकू से हटाना होगा , क्यूंकि   भारत  में बच्चे हाइकू  नहीं  खेलते ! ..... तो फिर क्या हाइकू ' खेल ' नहीं   रहा ?
                      यदि  ऐसा है , तो फिर हम  बड़ों को ,
एक  बार फिर से, ' हाइकू ' के बारे में विचार करना होगा ! इसकी शुरुआत 17 वीं  शताब्दी में जापान ने जिस तरह की , आज  उसका निर्वाह कर रहा है ! अर्थात वहाँ
का बच्चा आज  भी खेलता है हाइकू ! और बड़े  रच रहे है  ' चोका ' ! समाज के लिये साहित्य  का स्रजन , ऐसे 
ही तो होता है ! एक अनुशासन के साथ ! दायित्व बोध 
के साथ ! 
       हम ' उस देश से 1919 में ले तो आए 'हाइकू ' पर उसे  खेल नही बना पाए ! बच्चो के बीच ले जाना तो बड़े दूर की बात है ! जब हम बड़े न उसे खेल पाए ! न रच पाए ! न  समझ पाए ! ये आरोप नही ! दम्भ नही ! न 
उलाहना है . ये पीड़ा है ! किसी  विधा को आत्मीयता से 
आत्मसात  करने ज़ुरूरत है , वरना वो अज़नबी ही बनी रहेगी ! हर दसवाँ  लेखक  पूछता रहेगा .
                                                         .

                                                         .
हाइकू क्या है ?
.................................. और हम google से जानकारी 
चेपकर  जवाब  देते रहेंगे ? आज इतना ही !
                                thnx 
                                            डॉ . प्रतिभा स्वाति