Sunday, 8 December 2013

स्त्री / :)











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स्त्री / और  संकट !
रहते हैं सदा ,
घुलमिलकर !
मिलजुलकर !
 नही छोड़ते ,
दोनों /यूँ ही ,
कभी साथ !
इक़ - दूसरे का हाथ !

वो खिलखिलाती  है !
 रोज़ , / ख़ुद से ,
सारे दुःख छुपाती है !

कभी / अगर ,
आंसू ,आ भी जाते हैं !
बड़ी खूबसूरती से ,
मुस्कुराती है!
 और / फिर / नए
 बहाने बनाती है !

कुछ नही चाहती !
बेटी / बहन / पत्नी / माँ !!
मानिये तो / सचमुच हाँ !!

निभाती कर्तव्य !
लुटाती  प्यार !
अरे ! अब ,
उसे भी दो ,
सम्मान / अधिकार !!
------------------------------ डॉ . प्रतिभा स्वाति
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