Sunday, 20 September 2015

अथ योगानुशासनम ..



__________ पतंजली योग वशिष्ठ का पहला सूत्र :)

_____________________ आख़िर इस एक सूत्र में ऐसा क्या है ! जिसकी ज़ुरूरत सभीको है . जिसके दम पर मानव चाहे तो जीवन की दिशा बदल के रख दे ! हैवान भी इन्सान बन जाए ! न दुःख हो न क्लेश , न राग ,न द्वेष ! न पाप न गुनाह ......
__________________ ताज्जुब की बात ये है की अमृत बटता रहा , बिन मोल ...फ़िर भी लोग मरते रहे ! आख़िर क्यूँ ? बस इस ' क्यूँ ' से अवगत कराने में लगी हूँ पिछले 2 दशक से ......
____________ आज इतना ही ...
_______________________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति