Monday, 1 June 2015

बुरा जो देखन , मैं चला .......













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         मेरा संकेत ' उन ' links की तरफ़ है , जो google पर किसी भी सभ्य नागरिक व्दारा न देखी जाती हैं / न पसंद की जाती हैं ! जिन्हें वैचारिक प्रदूषण के  लिए कानूनन कुसूरवार ठहराया जा सकता है ! देश में पनप रही दरिंदगी के मद्देनज़र उन अश्लील link / page / vdo का बहिष्कार किया जाना चाहिए , पर..... जब हज़ारों की तादाद में लोग छुपकर उन link को open करते हैं .....तब वो नहीं जानते की एक तीसरी आँख है , जिसको आपके इस अनैतिक कृत्य की जानकारी हो चुकी है ......उसने आपको अपने group से block कर दिया है , और आपको खबर भी नहीं :)
जी हाँ , जब भी आप किसी ऐसी अश्लील link को open करते हैं , वह अपने - आप हर group  में share हो जाती है , जिसके आप सदस्य हैं!
face book पर madhubaahirn में जब २७०००  सदस्य शामिल हो गए/ तब ये कटु -सत्य मुझ पर ज़ाहिर हुआ ! admin होने के नाते तमाम सफेदपोश अपने काले चेहरे लिए group की block list में मौज़ूद हैं ! जिनसे समाज को खतरा है !हर स्त्री को इनसे सावधान रहना ज़ुरूरी है !
बहुत जल्द मैं वो list न सिर्फ़ उजागर करूंगी , अपितु साइबर क्राइम और महिला आयोग को भी सूचित करने का इरादा है .....thnx !
__________ डॉ. प्रतिभा स्वाति

Monday, 16 February 2015

शिव / भोले हैं


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शिव भोले हैं 
करें दुष्ट दलन 
प्रभु तुम्हें नमन 

प्रभु त्रिनेत्र 
उगलते शोले हैं 
फणिधर डोले हैं
_____________ सेदोका :डॉ.प्रतिभा स्वाति








Sunday, 15 February 2015

ख़ामियां ... होने दो ज़ाहिर

एक लम्बी -सी कविता .....जो हो रही पूरी / यूँ ही किश्तों में :)

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DR. PRATIBHA SOWATY: ख़ामियां ... होने दो ज़ाहिर:  ( link )
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 बुराई / नहीं है

  बुरी उतनी !

 उसे / होने दो

 ज़ाहिर !

 वो / ख़ुद

 तलाश लेगी

  रास्ते

 समायोजन के !

 सुखद ,...

आयोजन के :)

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मिली  बुराई !

भलमनसाहत !

हुई आहत !

____________________________ हाइकू : डॉ. प्रतिभा स्वाति




Wednesday, 4 February 2015

my 2nd blog

DR. PRATIBHA SOWATY: choka + ( चोका इस link पर )





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लुटाती रही !

ममता अनमोल !

मुस्काती रही !

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                  कितना कुछ शेष है अभी लिखने के लिए ......वक्त रुकता ,ठहरता ही नहीं , और मैं ये जानते हुए कि वो नहीं सुनेगा , उसे पुकारती हूँ ! मेरी अवाज़ उस निष्ठुर से टकराकर ,लौट आती है ....फ़िर मुझ तक..अब इस आवाज़ का मैं क्या करूँ ...मै फ़िर पूरी ताक़त से उसे उसी दिशा में धकेल देती हूँ .......और मुस्कुराकर इंतज़ार करती हूँ , उसके फ़िर से लौटने का :) 
___________ डॉ. प्रतिभा स्वाति


Monday, 2 February 2015

तुम आसमां...मैं ज़मीं हूँ शायद !





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ये बात और है......... कि  वो दोनों ,
क्षितिज़ पर..... ज़रा देर को ठहरे !
नहीँ दोनों में, कोई  गिला-शिकवा,
दिखें इन्द्रधनुष औ ख़्वाब सुनहरे !
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ज़मी को है.........गिला ख़ुद से !
आसमां को .. कुछ दे नहीं पाती !
हर मौसम से की हैं..... मनुहारें ,
कोई तो पहुंचाए ,प्रेम की पाती !
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पर आसमां ...सब समझता है !
है दोनों ही की ..........मज़बूरी !
रिश्ता जब, दिल में  पनपता है ,
मायने  नहीं रखती  कोई  दूरी .
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संदेसे ......रुसवाइयों के डर से !
ले  जाती है .....किरण छुपकर !
ज़मीं को नाज़  है........... बेहद ,
अपने........... नीले आसमां पर .
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कभी .............चांदनी उढ़ाता है !
कभी .................धूप की चूनर !
देती  दिल  से  दुआएं   फ़िर ,
आसमां को ,ज़मी ख़ुश होकर !
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कह दो ............ज़माने  की ,
उट्ठी हुई .......अँगुलियों  से !
दोनों के ....दरमियाँ रिश्ता,
सचमुच ,निहायत पावन है .

सुबूत ........ये मौसम है !
और ये .........नज़ारे  हैं !
रिमझिम .......बरसकर !
गवाही देता ......सावन है !
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ये रिश्ता , बेहद पावन है !
ये रिश्ता, बेहद पावन है !
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___________ डॉ. प्रतिभा स्वाति