Monday, 20 June 2016

बुलेट ट्रेन .....









 बुलेट ट्रेन _ (ndtv india )
_____________:मुंबई-अहमदाबाद के बाद दूसरी बुलेट ट्रेन दिल्ली-वाराणसी के बीच चल सकती है। यदि ऐसा हुआ तो दोनों शहरों के बीच 782 किमी की दूरी सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट में तय हो जाएगी।
___________वातानुकूलित प्रथम श्रेणी के वर्तमान किराए का डेढ़ गुना प्रस्तावित किया है।  अभी मुंबई और अहमदाबाद के बीच दुरंतो एक्सप्रेस में प्रथम श्रेणी एसी का किराया 2,200 रुपये है। इसका मतलब यह हुआ कि बुलेट ट्रेन का किराया 3,300 रुपये होगा। दोनों शहरों के बीच की दूरी 508 किलोमीटर है।
 ____________ परियोजना पर कुल 97,636 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
 _____________सरकार ने जापान से 0.1 फीसदी ब्याज दर पर एक लाख करोड़ रुपये का ऋण लिया .
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'डेडिकेटेड हाई स्पीड रेलवे (एचएसआर) नेटवर्क इन इंडिया (इशूज इन डेवलपमेंट) शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा कि रेलवे को कर्ज और ब्याज समय पर चुकाने के लिए परिचालन शुरू होने के 15 वर्ष बाद तक 300 किलोमीटर की यात्रा के लिए टिकट का मूल्य 1500 रुपया निर्धारित करना होगा और प्रतिदिन 88,000-1,18,000 यात्रियों को ढोना होगा।
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जापान ने परियोजना लागत के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से के रूप में 97,636 करोड़ रुपये के रियायती ऋण की पेशकश की है। जापान के प्रस्ताव के अनुसार ऋण को 50 वर्ष के भीतर चुकाना होगा और परिचालन शुरू होने के 16वें वर्ष से 0.1 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। रिपोर्ट के लेखकों के अनुसार शेष 20 प्रतिशत ऋण के लिए आठ प्रतिशत की औसत ब्याज दर होगी। उनके अनुसार जापान ने 15 वर्ष का ऋण अवकाश दिया है, इसलिए रेलवे के लिए राजस्व की चिंता 16वें वर्ष से शुरू होगी। यह ट्रेन कुल 534 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।
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 ___________        तो भई बात यूँ है कि जिस मामले में आप कुछ न कर
 सकते हों वहां पर चुप रहा जाना चाहिए . ऐसा हमारे
 बुजुर्गों  ने कहा है . पर बुज़ुर्ग तो ये भी कह गए कि.....उधार ....___
उधार लेकर घी नहीं पीना  ! और फ़िर कौन किसकी

सुनता है संसद में विवाद और चौराहे पर होने वाली बकैती

 कोई नहीं रोक सकता ? खैर बच्चों को बड़ा इंतज़ार होगा

 इस ट्रेन का :) और हमारे मंत्री -संत्री भी बहती गंगा में हाथ

 धो ही लेंगे , गंगा जी क्या मना करेंगी ! पर उधारी के नाम

 जिनका खून सूख रहा है वो है बिचारी आम जनता

 , जिसने जनरल डब्बे में जिल्लत झेलनी है . काश इन

 डब्बों के उद्धार के बारे में कोई सतरंगी घोषणा हो जाए

 ......काश ..... 

________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति

Thursday, 2 June 2016

तोड़ देती हूँ वो रिश्ता ....


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 सुकूं दिल को मिलता  नहीं ,
सम्मान दांव पर जब हो !
हाथ में मरहम दिखावा  हो ,
नमक , घाव  पर  जब  हो !

मुझे तैरना बखूब आता है ,
 साहिल से देखने वालों !
कौन तब सवार होता है ,
छेद  ,नाव  पर  जब हो !

तानाशाही की  नहीं कायल ,
ज़माने को बता देना तुम !
बंदिश तोड़ ही देती हूँ सब ,
हाव - भाव  पर  जब  हो !

रिश्ता अहमियत नहीं रखता,
चाहे............ खून मेरा ही हो !
तोहमतें उठाऊं  ममता पर ?
या.......... लगाव पर जब हो !

मेरी सांसों का  हिसाब नहीं ,
लुट गई ......ज़िंदगी यूँ ही !
रिश्तों  की रवानगी कायम
मोलभाव ......पर जब हो !

चील -कौउवे - गिद्ध बाज़ ,
गौरैया पे रहम खाते हैं ?
सिद्धांत , मतलब परस्ती 
लूटो 'खाव' पर जब हो !
__________________ डॉ.प्रतिभा स्वाति

कोलाज ....

मुझको  (वक्त की )बर्बादी का(आज) कोई गम नहीं :)








 '   'कोलाज '   हिंदी  नहीं  अपितु फ्रेंच भाषा का शब्द है :) अधिकांश  लोग इसे अग्रेज़ी का मान लेते हैं :) बड़ी मेहनत की ऑनलाइन ...........तब जाकर ये haiga कोलाज़  बना :) ' हाइकू के इतिहास का ऑनलाइन  धमाका :)



______________ टोटल  टाइम इनवेस्टमेंट के बाद :)



___________कोलाज -----
__________ - यह कोले शब्द से बना है जिसका अर्थ है चिपकाना. इस कला ... थ्री-डी इफेक्ट की वजह से इसमें पेंटिंग और स्कल्पचर दोनों का आनंद मिलता है. ... कंप्यूटर्स के बढ़ते यूज ने कोलाज में भी इंटरफेयर किया है, इसे डिजिटल कोलाज का नाम मिला है.



___________________________ - प्रकाशन जगत में कोलाज का बहुत महत्व है और जिस विषय को हम अभिव्यक्त करना चाहते हैं उसका सार प्रकट हो जाता है। विजुअल कला के अंतर्गत कोलाज को रखा गया है !




_________________________ कोलाज् ‣ कई चित्रों को साथ चिपकाकर बनायी गयी कलाकृति है !


_______________________________ प्रस्तुति : डॉ.प्रतिभा स्वाति 






Tuesday, 31 May 2016

माँ / अस्वीकार क्या कहूँ ....





 करता है ज़ुर्म छुपकर ,
गुनहगार क्या  कहूँ !
सुबूत के अभाव में सच
जाता है हार क्या कहूँ !

मोल नहीं ममता का ,
दिल के उद्गार क्या कहूँ !
पालन-पोषण-परवरिश,
 है सब बेकार क्या कहूँ !

न गिले न रखीं शिकायतें ,
बातें दो -चार क्या  कहूँ !
नफ़रत मैं लाऊं कहाँ से ,
दामन् में प्यार क्या कहूँ !

करती हूँ रोज़ ही ख़ुदा से ,
अर्ज़/मनुहार क्या  कहूँ !
कानोकान खबर नहीं है ,
न जाने संसार क्या कहूँ !

मैं मुआफ़ किये जाती हूँ ,
बहुत  बेज़ार क्या  कहूँ !
जीती हुई बाज़ी ख़ुद ही ,
जाती हूँ हार क्या कहूँ !

क्यूँ दोष है बेटों के सर ,
मढ़ते हरबार  क्या  कहूँ !
बेटी मिले बाप से  कहे ,
माँ अस्वीकार क्या कहूँ!
___________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति




(सन्दर्भ)


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Monday, 30 May 2016

सूर्यनमस्कार/ 12 मन्त्र



:)

online yoga

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आप बन सकते हैं सदस्य , "ऑनलाइन  योगा" क्लब के :)
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DR. PRATIBHA SOWATY: online yoga by Dr. pratibha sowaty:



खिलता है यूँ नागफनी...


वो मौसम है ....

मेरे  दिल का टुकड़ा ही , मुझको छलता है !
जैसे कोई  मौसम है , जो रोज़  बदलता है !

इक  गुनाह  माफ़ करती हूँ , आह भरके !
 और इक  को भूल जाती हूँ , चाह  करके !

पर वो  बदगुमान  इस कदर हो गया  है !
जिसे दिया था  जनम ,  वो  खो गया है !

__________________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति





DR. PRATIBHA SOWATY: वो मौसम है ...