Wednesday, 7 August 2013

सुनो कबीर .... (1)

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सुनो  कबीर !
रे  सुन भई  साधो !
कलयुग  है !
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मात -पिता  को ,
अब मान नहीं है !
सब  ही अंधे ,
कोई ज्ञान  नही है !
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स्वार्थ  की पूजा !
हर  घर  में  होती !
देहरी  तक  आके ,
खुशियाँ  रोतीं !
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मन  में अनबन !
झूठे  बंधन !
दादा -दादी - दोहती !
नाती क्या पोती ?
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कोई रिश्ता  ना दूजा !
पैसे  की  पूजा !
सीधी हैं  खासी ,
सब उलटबासी !
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सुन  रे साधो !
राम -रहीम में धोखा !

सब कहते ,
भैय्या !पैसा  ही चोखा !
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सुनो  कबीर !
अब  तोता औ मैना ,
जीवनभर ,
लड़ते औ मरते !
सच  में भैय्या ,
प्यार नही  करते !
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---------------------------jari -----hsesh bha  2.

37 comments:

  1. बहुत सार्थक और सटीक....

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  2. Wow..kya baat likhi h aapne...gajab,,,n,nice image :-)

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  3. सार्थक ... सभी छंद गहरा अर्थ लिए ...

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  4. aap bhuta achaa likhtI hai.
    kabhI mere blog "unwarat.com" para aaiye.padne ke baad apane vichaara avshay vykta kIjiyegaa.
    Vinnie

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  5. achcha lagta hai jab koi kabir ko baar-baar rachta hai.

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  8. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीया --

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  9. सच कलयुग में क्या-क्या नहीं देखना पड़ता है ...आज के हालातों की सटीक अभिव्यक्ति .....
    बहुत सुन्दर सार्थक रचना ..
    यूँ ही लिखती रहो ...
    शुभकामनायें

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  10. aaj se me bhi aa gai hu dr di

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  11. गौरैया : डॉ. प्रतिभा स्वाति
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    सचमुच / अब ,

    वो नहीं दिखती !

    अब कहाँ रहे ,

    वो आंगन / चौपाल ?

    गोधूली बेला में ,

    रंभाते हुए बछड़े !

    धूल उड़ाती गैय्या ,

    शोर मचाते ग्वाल !

    अरे !

    मेरे पास / तो बस ,

    कुछ यादें हैं !

    बचपन की !

    भुला दूँ / तो क्यूँ आख़िर ?

    और याद रखूं / तो

    इनका क्या करूं फिर ?

    खोजती हूँ / रोज़

    और / सहेजती हूँ चित्र !

    और बुन देती हूँ !

    कोई गीत / कहानी !

    नई नस्ल के लिये !

    जैसे संजोता है किसान ,

    अच्छे बीज !

    उम्दा फस्ल के लिये !

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  12. mujhe to apna blog khjna b mushkil lagta h kabi -kabi

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  13. mujhe bhi reply kiya karo blog par

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  14. आ० बहुत अच्छी प्रस्तुति , लेकिन ये बातें मिथ्या भी हैं , क्योंकि , स्वयं शिव जी ने माता पार्वती से कहा था
    ॥ उमा कहऊ मैं अनुभव अपना , सत् हरि: भजन जगत एक सपना ॥ , शिव चालीसा में भी एक जगह ये लिखा हैं , मात पिता भ्राता सब कोई संकट में पूंछत नहीं कोई , इसका अर्थ सही से गीता के जरिए समझ सकते हैं , जब अर्जुन के सामने रण में उसका पूरा परिवार उसके खिलाफ खड़ा था , तब भगवान कृष्ण ने उसको यही संदेश देकर उसके मोह का त्याग करवाया था , धन्यवाद
    ॥ जय श्री हरि: ॥

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  15. u r rt / आशीष भाई aye ek ' choka' rachna h ---------- isme writer badhya hota h , 5 ya 7 akshar ki vakya rachna k liye ! इसका दूसरा भाग , मे अब तक नहीं दे pai

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