Tuesday, 20 September 2016

100 सवाल ........17 पर...

               सच पूछिए तो जो हुआ __________ उसकी कड़ी  निंदा होनी  चाहिए , होनी ही चाहिए ......और हो भी रही है ! जनता का रक्त खौलना चाहिए , देश का मुद्दा है ______ खून के उस खौलने में रंच -मात्र कमी नहीं रही ! रही  बात प्रतिशोध  की तो यहाँ पर घटना में ज़रा -सा झोल है !!!

                 अब  यदि विश्व -स्तर पर कोई विवशता है ,तो  जनता  बिचारी  क्या  करे ? ये काम तो बिसात पर  बिराजे  वज़ीरे-आला  ही को करना  होगा . उन्हें ये  सिखाने  के लिए   चाणक्य  या हिटलर ,गांधीजी या ईसामसीह या बुद्ध - महावीर तो आएँगे  नहीं !

                 लेकिन जब बड़े- बड़े बोल बोले गए थे हिलाके हाथ ,तब ज़रा -सा सोच लेते . जनता बिचारी सच्ची मान गई . जनता  बेचारी  ही होती है . भोली . बालक समान , पल में तोला -पल में माशा . अरे भाई जब 17 की शहादत सुनी तो __________ क्या उम्मीद करते हैं ? जनता पूछेगी वो कौन थे ? उनके नाम क्या थे ? वे कैसे दुश्मन की चपेट में आ गए ? अब बाकी को तो कोई खतरा नहीं ? अरे भैय्या उनसे कहो ज़रा सावधानी से रहें सीमा पे , दुश्मन बड़ा नीच है ह्म्म्म्म ? जनता यानी प्रजा वो तो सन्तान जैसी है _________ कुत्ता काटेगा तो बच्चा बोलेगा " पापा  मारो साले को " अब ये तो पापा तय करेंगे पहले डॉक्टर  को बुलाएं , ड्रेसिंग करे या बच्चे को ले जाएँ ! कुत्ते को तो बाद ही में देखा जाएगा .  काटा तो क्यूँ काटा ? कटखना है ? पालतू है ? पागल है ? कहीं बच्चे ने दुम पे पाँव तो नहीं रख दिया ? 

             पर इस 17 वाली घटना में पापा जानते हैं , कुत्ता पागल  है . फ़िर सवाल ये है की बच्चे   सावधान  क्यूँ  नहीं थे ? आख़िर   इतना  बड़ा रिस्क ? या  फ़िर उस वक्त कोई लापरवाही हुई ....जिससे कुत्तों  को मौका मिल गया . बात  यूँ है  की हम इन पागल  कुत्तों का कुछ बिगाड़ नहीं सकते , वो पड़ोसी  के हैं और पड़ोसी से हमारी कट्टर दुश्मनी  है ________ ये बात सब  बच्चे जानते  हैं ....... फ़िर भी . अभी  पापा पड़ोसी को निपटाने  की जुगत में है की पास- पड़ोसी , नाते रिश्तेदार सब चले आए नसीहतें देने ...... अब .....?

                        मामला बाबा दादा के जमाने से चला आ रहा है __________ अदालत में निपटारा हो सकता है !पर यहाँ तो वकील पर ही गाड़ी अटकी पड़ी है . अरे भई  पड़ोसी को अदालत में निपटा लीजो ........... कुत्तों को तो मारो ! के उसके लिए भी शाही फरमान चाहिए ! इत्ती -सी बात  बच्चा  समझता  है ............  'तन्ने  समझ नि आवे ?' hmmmm ?

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यदि  यद्ध हुआ तो ?  ये कोई बच्चों का खेल नहीं !
अगली नस्लें भी खामियाज़ा भुगतेंगी ______ भोली जनता !
____________ अब इस मर्ज़ के इलाज़ के लिए हिटलर + चाणक्य के मेल से इज़ाद एक चुपचाप बम की ज़ुरूरत है की _____ सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे !
_______अगर कुछ  फ़ौजी vdo और pm के पिछले हवाबाजी  वाले  भाषणों के  हवाले  से जनता ये मान  बैठी  है की हल्ला बोल की तर्ज़ पर हमला हो , तो ये तो शुरुआत होगी ! फ़िर होगा युद्ध ! और ये  कतई  ज़ुरूरी  नहीं की ये सिर्फ़ भारत - पाक के बीच हो , समर्थन कर्ता और सहयोगी दूसरे देश भी कूद सकते हैं साथ में . हो सकता है ये विश्व -युद्ध में परिणित हो जाए , तब ? कौन ज़िम्मेदार होगा ,परिणाम के लिए ? 
                   नहीं मालूम तो मालूम कीजिये ! पिछले युद्धों के हवाले काफ़ी नहीं ? हद है मूर्खता  की ! क्रोध - रोष जायज है पर विवेक ताक पर रखकर ? बचपन में स्कूल  नहीं गए ? भूल गए नागासाकी और हिरोशिमा का हश्र ? महाभारत तो देखी  ही होगी ? क्या  बचा था अंत में ? अशोक को क्या मिला था विजय के बाद ? सिर्फ़ राम -रावण युद्ध में  जन-संहार कम हुआ होगा , ऐसा सोच सकते हैं , दोनों पक्ष समझदार थे , और लंका के विरोध में अयोध्या  नहीं वानरसेना थी ! है हमारे पास ?
______________देखिये मैं कोई कायराना 'मोड' पर नहीं हूँ . न ही देश के मनीषियों को विवाद के लिए आमंत्रित  कर रही हूँ . सीधी सी बात ,सीधे से तरीके से सीधी-सादी जनता को समझाना  चाह  रही  हूँ ! जो जन आज 17 की मृत्यु पर आपा  खो रहे हैं ------- उनको अंदाज़ होना चाहिए कि जिस युद्ध को वो बदला या हल मान रहे हैं उसमे सैकड़ों  लाशें  बिछ  जाएंगी . जिस ज़रा -सी महंगाई के बढ़ने पर वो कोहराम बरपा  देते  हैं वो सुरसा जैसे कई गुना बड़ा मुंह करके सामने आएगी ! 

___________ हवाई हमले भी होंगे ! बोलो हो सब मरने के लिए तैयार ? बोलो ?

 ______________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति