Wednesday, 12 February 2014

3 / पोस्ट

            आज  आम इंसान बड़ी जल्दी में है ! उसे फ़ुर्सत कम है ! हर व्यक्ति अपने बारे में फिक्रमंद है ! दूसरों से बेपरवाह !
                वक्त की कमी है या वक्त की ज़ुरूरत , जो भी हो ! लंबी कविताएँ डायरी में मुस्कुराती हैं ! मै उन्हें समझाती हूँ , कि वक्त आने पर ज़ुरुर ब्लॉग पर दूंगी ! किसी अख़बार या मैगज़ीन में भी ! हो सका तो काव्य- संग्रह ही प्रकाशित करवा दूंगी :)
                   और फिर उस रचना से 2 लाईन निकालकर , उसे किसी चित्र के साथ आम पाठक तक पहुंचा देती हूँ ! अपने पेज और अपने group के माध्यम से !----------- पाठक भी ख़ुश / और मै भी !