Monday, 10 February 2014

मन ...


     
                  मुझे गीता के छठे अध्याय का वो आधा श्लोक  भुलाए  नहीं  भूलता --------

' चंचलं हि मन : क्रष्ण ......वायोरिव  च दुश्क्रताम ..

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 फिर  भी मैने ये लिख डाला :)



13 comments:

  1. बहुत सुंदर लिख डाला :)

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  2. कल 13/02/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  3. जिसकी कल्पना ही इतनी सुंदर है वास्तव में वह समाधि कैसी अद्भुत होगी...

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  4. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  5. बहुत सुन्दर और प्रभावी..

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