Wednesday, 30 October 2013

फूल

           'गीत '  सच पूछा जाए तो मुझे अच्छे लगते हैं !शुरुआत के  दिनों में तमाम बाल - गीत लिखे ! जिन्हें  'नई दुनिया ' बच्चो के कालम में प्रकाशित करता रहा ! अब भी  मनी ऑर्डर की पर्चियाँ सहेजकर रखती हूँ , कि तब मै गीत लिखा करती थी ! कहानी लिखती थी ! फिर हाइकू 
लिखने लगी ! मुझे  वर्णिक छंद पसंद हैं ये बात नही ! 
सच  कहूँ तो मात्रिक छंद  बड़े कठिन लगते हैं !:)
_______ और वही बात फ़िर से type करना , बेहद उबाऊ महसूस होता है :)
-------------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति 
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ये ' रोज़ -डे ' पर लिखा था ! हाँ , मै फूलों को तोड़े जाने के ख़िलाफ़ हूँ ! :)

--------------------------- ये बात फिर कभी !