Monday, 2 June 2014

हे हरि ..म्हारी...सुणलो ...बिणतीZZZZ

       मीरा ----- 
एक शब्द या संज्ञा नहीं / सम्पूर्ण समर्पण का नाम है ! जब भी , जहाँ  भी क्रष्ण  होते हैं , वहां .... मीरा भी हैं ! पर जहाँ मीरा हैं ....... वहां / सिर्फ़ ' क्रष्ण  ' ही हैं !
               भक्ति के परिप्रेक्ष्य में वे चमकता हुआ सितारा हैं ! किन्तु अफ़सोस ... उस समय ,जो  दर्द /  संत्रास / पीड़ा / अवमानना / विरोध / प्रतिकूलता / द्रोह /लांछन ....... जो / उन्हें भुगतना पड़े ! क्या उसकी वजह सिर्फ़ उनका --- ' नारी ' होना था ?
--------------- मीरा पर चर्चा ज़ुरूरी नहीं / पर उन्हें समझने के लिये , आपके मन का मीरा होना अनिवार्य है !
---------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति